बुधवार, 27 नवंबर 2013

Jamane

जो बीत गए फिर वो ज़माने नहीं आते,
आते है, मगर लोग पुराने नहीं आते।

इस पेड कि हर शाखा तो, सुखी ही पड़ी है,
पँछी भी यहाँ रात बिताने नहीं आते।

में इस ज़माने दौर का, वीराना खंडर हुँ,
बच्चे भी यहाँ शोर मचाने, नहीं आते।

लकड़ी के मकानो में तुम, चिरागो को ना रखियो,
कि अब आग पड़ोसी भी बुझाने नहीं आते।

अपने ही मकानो में, हम तो पराये हैं,
अपने भी यहाँ ख़ुशी जताने नहीं आते।

जो बीत गए फिर वो ज़माने नहीं आते,
आते है, मगर लोग पुराने नहीं आते।


Bharosha

भरोसा मत करो, सांसो की डोरी टूट जाती है,
छते महफूज़ रहती है, हवेली टूट जाती है।

लड़कपन में किये वादों की कीमत कुछ नहीं होती,
अंगूठी हाथ में रहती है, मंगनी टूट जाती है।

किसी दिन त्याग के बारे में उनसे पूछिए जिसकी,
कुवे में बलती रहती है रस्सी छूट जाती है।

कभी कोई कलाई एक चूड़ी को तरसती है,
कही कंगन के झटके से कलाई टूट जाती है।

छते महफूज़ रहती है, हवेली टूट जाती है।